
- Language: Book
- Weight: 200.00g
- Dimensions: 22.00cm x 14.00cm x 2.00cm
- ISBN: 9788198946249
“आधुनिक युग में आस्तिकवाद” उन लोगों के लिए है जो आज के दौर की धार्मिक विसंगतियों से परेशान हैं। यह पुस्तक तर्क देती है कि आध्यात्मिकता और धर्म समाज में शांति और नैतिकता बनाए रखने के स्तंभ हैं, लेकिन जब इनका उपयोग शोषण के लिए होता है, तो समाज बिखरने लगता है। क्या ईश्वर को मानना केवल एक धार्मिक मजबूरी है, या यह हमारे नैतिक अस्तित्व की अनिवार्य शर्त? आज जब धर्म के नाम पर शोषण और विभाजन का अंधेरा गहरा रहा है, यह पुस्तक 'आस्तिकता' की एक नई और क्रांतिकारी परिभाषा गढ़ती है।
यह केवल पूजा-पाठ की बात नहीं करती, बल्कि उस 'दिव्यता' की बात करती है जो निस्वार्थ सेवा और सत्य के आचरण में छिपी है। चाहे आप ईश्वर के पारंपरिक नाम से सहमत हों या न हों, यदि आप सच्चाई के साथ खड़े हैं, तो आप अनजाने में ही उस परम तत्व से जुड़े हैं।
लेखक ने बहुत ही सूक्ष्मता से रेखांकित किया है कि दिव्यता का संबंध किसी मंदिर या मस्जिद से उतना नहीं है, जितना कि एक व्यक्ति के 'सत्य' के प्रति समर्पण से है। यह पुस्तक अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ एक वैचारिक प्रहार है और सच्ची मानवता का घोषणापत्र है।
डॉ० सत्येन्द्र कुमार सेठी (जून 19, 1955 नई दिल्ली) का जन्म एक आर्य समाजी परिवार में हुआ। इन्होंने वनस्पति शास्त्र में पीएच० डी० की उपाधि प्राप्त की। डॉ० सत्येन्द्र कुमार सेठी ने अपने शैक्षणिक ज्ञान और कम्प्यूटर कौशल का उपयोग गतिशील वातावरण व देश-विदेश में अपनी क्षमताओं के अनुसार कार्य करने का अनुभव हासिल किया। अपनी शैक्षिक योग्यता के अन्तर्गत शिक्षक, लेखक, शोधकर्ता के साथ-साथ आध्यात्मिकता के क्षेत्र में भी रूचि रखते हैं।
नार्वे से प्रकाशित द्वैमासिक पत्रिका 'स्पाइल दर्पण' के सम्पादकीय मंडल के सदस्य रहते हुए भारत और कनाडा में पत्रिका का प्रतिनिधित्व करते हैं। अमेरिका में भारतीय समुदाय के साप्ताहिक समाचार पत्र 'इन्डिया पोस्ट', 'इन्डिया ट्रिब्यून' और 'इन्डिया वेस्ट' में कार्यरत रहे।
आधुनिक युग में आस्तिकवाद
सत्येन्द्र कुमार सेठी
86
240.00
